प्लास्टिक,पृथ्वी के लिए अभिशाप

आज भले ही हम पर्यावरण को बचाने के लिए तमाम अभियान चला रहे हैं पर जब तक हम प्लास्टिक का इस्तेमाल करना बंद नहीं करेंगे तब तक भूल ही जाइए कि धरती ढंग से सांस ले पाएगी.

जानते है प्लास्टिक से होने वाले नुकसान:-

1. पृथ्वी के लिए सबसे घातक पॉलि‍थीन है क्योंकि इसके इस्तेमाल से भूमि की उर्वरक क्षमता नष्ट हो रही है. वहीं इसे जलाने से निकलने वाला धुआं ओजोन परत को नुकसान पहुंचाता है, जो ग्लोबल वार्मिग का सबसे बड़ा कारण है.

2. यहीं नहीं प्लास्टिक जब खिलौनों की शक्ल में बच्चों के बीच आता है तो वह बच्चों के लिए बेहद हानिकारक होता है.

3. प्लास्टिक बैग्स बहुत से जहरीले केमिकल्स से मिलकर बनते हैं. इसे बनाने में जायलेन, इथिलेन ऑक्साइड और बेंजेन जैसे केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. इन केमिकल्स से बहुत सी बीमारियां और विभिन्न प्रकार के डिसॉडर्स हो जाते हैं|

4. प्लास्टिक को पूरी तरह से नष्ट नहीं किया जा सकता. अगर आपको लगता है कि इसे जलाने से नष्ट किया जा सकता है तो बता दें कि प्लास्टिक जलाने पर भारी मात्रा में केमिकल पैदा होता है. जो सांस लेने पर शरीर में प्रवेश कर श्वसन प्रक्रिया को भारी नुकसान पहुंचाता है|

रोज़ प्लास्टिक का उपयोग हो रहा है,और इसके विभिन्न नुकसान हैं-

साल 2018 में भले ही विश्व पर्यावरण दिवस की थीम बीट प्लास्टिक पॉल्यूशन क्यों ना हो। लेकिन सवाल ये प्लास्टिक पॉल्यूशन से छुटकारा मिलेगा कैसे। जब हम रोज़मर्रा की जिंदगी में सुबह से शाम तक प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हो तो भला प्लास्टिक को बीट करना बड़ी चुनौती है। जिसे हर हालत में पार पाना ही होगा।

1.नमक से लेकर सब्ज़ी तक प्लास्टिक में

घर का सबसे अहम हिस्सा होता है किचन… जहां से सबकी सेहत का राज़ जुड़ा होता है। लेकिन उसी किचन में प्लास्टिक आज पैठ बना होता है।नमक, घी, दूध, तेल, आटा यहां तक की सॉस भी अब प्लास्टिक के छोट छोटे पैकेट में आती है। बाज़ारों से सब्ज़ी लानी तो भी प्लास्टिक के थैलों का इस्तेमाल धड़ल्ले से जारी है। जिसके जिम्मेदार हम ही हैं।

2.खाने के लिए प्लास्टिक कंटेनर का इस्तेमाल

वज़न में प्लास्टिक के हल्के होने के कारण आमतौर पर लोग इन्हे ही इस्तेमाल में लेते हैं। लेकिन वो इस बात से अनजान है कि खाने के साथ साथ वो केमिकल भी खा रहे हैं। इसका खतरा टाइप 3 और 7 या किसी हार्ड प्लास्टिक से बने कंटेनर्स में और भी बढ़ जाता है। इन प्लास्टिक्स में बायस्फेनॉल ए केमिकल पाया जाता है जो शरीर के हॉर्मोंस को प्रभावित करते ही है। महिलाओं में जहां ब्रेस्ट कैंसर का खतरा रहता है तो वही पुरुषों में स्पर्म काउंट घटने का भी रिस्क होता है। खासतौर से ये तब और भी हानिकारक हो जाते हैं जब इन्हे बार बार गर्म किया जाता है।

3.पॉलिथीन में चाय पैक करने का चलन

आमतौर पर चाय की दुकानों पर दुकानदार चाय को प्लास्टिक की थैलियों में पैक करके देते हैं जो गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। इससे कैंसर होने का ख़तरा कई गुना बढ़ जाता है। दरअसल, बेहद गर्म चीजों के साथ प्लास्टिक रिऐक्शन करता है जिससे कैंसर कारक तत्व पैदा होते हैं।

ऐसे कर सकते हैं बचाव

अगर पर्यावरण को बचाना है तो ज़रूरी है कि प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोका जाए। और इसके लिए हमें ही रोज़मर्रा की जिंदगी में बस कुछ ज़रूरी कदम उठाने पड़ेंगे जिससे पर्यावरण को बचाया जा सकेगा।

बाज़ार से कुछ सामान लाना हो तो प्लास्टिक के थैलों की बजाय जून या कपड़े के बने थैलों का इस्तेमाल करें।

छोटे बच्चों को आमतौर पर प्लास्टिक की बोतलों से दूध पिलाया जाता है जो सेहतमंद नहीं होता लिहाज़ा इस आदत को जल्द से जल्द बदलना ज़रूरी है।

प्लास्टिक की जगह स्टील या कांच की बोतल का इस्तेमाल करें।

प्लास्टिक की बोतल को गर्म होने से बचाए। धूप में खड़ी बंद गाड़ियों में रखी प्लास्टिक की बोतलों में रखा कोई पेय पदार्थ न पीएं।

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